फ़ॉलोअर

बुधवार, 10 फ़रवरी 2016

अन्तिम कालांश

Image result for picture of a classroom with students and teacher
कक्षा  का अन्तिम दिन था 
सत्र  के अन्तिम कालांश का अंत  था 
 आँखे कुछ भरी हुई सी थीं 
पर दिल कुछ खाली खाली था

उभर के आया वह पहला दिन 
हर चेहरा अजनबी  सा  था 
आज यहाँ  हर एक का चेहरा 
दिल में  मढ़ा हुआ था 

कुछ शरारती कुछ चंचल आँखें 
कुछ मौन कुछ व्याकुल आँखें 
 सब स्थिर सब ठगी हुई सी 
सबमें स्नेह सजा हुआ था 

विश्वास ममत्व का ताना बाना 
हर एक दिल पर चढ़ा हुआ था 
दिन दिन सींचा एक एक फूल 
बगिया बन कर खिला हुआ था 

शब्द  कहाँ था, भाव था ऊपर 
बोल सीमित, भाव से गढ़ा  हुआ था
कहीं सुख था कहीं संताप 
हीरे गढ़े थे देना था आज 

मोह ऐसा न्यारा  बंधन  है 
छुटाए  कभी नहीं छुटता 
चाहत थी दोहराव की मन में 
उनके भी और मेरे मन में भी 

परिवर्तन है दुनिया का नियम 
प्रगति का शाश्वत आधार 
संतोष मुझे सजाना था 
आशीर्वचनों ,शुभकामनाओं  के साथ 




चित्र साभार गूगल से 

मंगलवार, 3 नवंबर 2015

लाल परी


  
१ 

सुर्ख गुलाब राजा पृथ्वी का 
स्वर्ग लोक की मैं  रानी 
गुलाब ,गुलाल ,गोल सूरज से 
रंग लेने की ठानी 
शोख , चंचल , अतुल्य सुंदरी 
लाल परी  की यही कहानी
   
 २ 

चम चम चमकता जल प्रतिबिंब 
जब परी  लोक चमकाता 
सुनसान अँधेरी रातों का जुगनू 
जब धरती पर दीप जलाता 
मंद बयार बहती हौले से 
जब पत्तों को छू जाती 
परी लोक की लाल परी  तब 
इस रुपहली  दुनिया में आती 

शुक्रवार, 25 सितंबर 2015

आदर किसका...

आदर है एक भाव का नाम, 


स्वाभाविक धर्म का यह धाम। 

यह किए कराए आता, 

कर्ता के हृदय में सहज समाता।

आदर करो उस सूर्य का, 


जो बिना थके चलता रहता। 

निस्वार्थ भाव से बढ़ता जाता, 

चैन की साँस  कभी    लेता।

आदर  करो  उस  वृक्ष का, 


जो  मानवता लिए  जीते  जाते। 

आँख खोली, बाँटा  जीवन, 

मृत्यु  हमें  देते  जाते।

आदर  करो उस नारी  का, 


जिससे  धरती  का  वज़ूद। 

त्याग, ममत्व, सौंदर्य  धरती  का, 

ईश्वर का अनोखा रूप।

आदर  करो  उस  गुरु  धर्म का, 


जो  है  शिष्य  का  अभिमान। 

विश्वासश्रद्धा , आज्ञापालन, 

डालते  इसमें  स्वत: प्राण।

आदर  करो उस  धर्म का, 


सदैव  बनाता  हमें  महान। 

अच्छा, बुरा, सही, गलत, 

पाप - पुण्य का देता  ज्ञान।

आदर  करो उस देशप्रेमी का, 


देश अन्न का  कर्ज  चुकाता। 

जीते  कर्म  करता  जाता, 

मर के  नाम  अमर  कर  जाता।

आदर करो उस परमपिता  का, 


जिसका  अरूप  होता  स्वरूप। 

दिखता कभी नहीं  हमको, 

देता  हमको बल, बुद्धि, रूप।


आदर  करो  उस स्वत: अस्तित्व  का, 


जो   कण  है  उस परमपिता  का। 

अक्स  बनाए  स्वयं को  उसका, 

धर्म  सजाए , कर्म के  रूप। 


सोमवार, 17 अगस्त 2015

तोताराम

Image result for image of parrot
हरे  हरे  पंख  हैं  मेरे,
चोंच  लाल  लाल।
राम राम  करता हूं  मैं
पिंजरा  हो  या  डाल
सारे जहाँ  में  उड़ता
खाता आम, मिर्ची
तीखा  खाने  पर भी
ज़ुबान  है  मेरी  मीठी 

सोमवार, 10 अगस्त 2015

रंगबिरंगे प्यारे पक्षी

1 
मैं  हूँ  छोटा  प्यारा  पक्षी 
पैर  भी  मेरे  छोटे 
पर  भगवान  ने  दिए हैं  
मुझको  पर  मोटे  मोटे 
दोनों  पर  फैलाकर  अपने 
सैर  करता  दुनिया की 
  हरे  पहाड़,  नीली  नदी 
सब  रंगरंगीली  दिखती 
घर  है  मेरा  घोंसला 
वहां  चूं चूं  चूं मैं  करता 



2
मैं  होता  यदि  प्यारा  पक्षी, 
पँख  बड़े  फैलाता। 
उड़ते - उड़ते  
इस  रंगबिरंगी, 
दुनिया की सैर 
कर  आता। 
बच्चे  कहते 
नीचे  आओ, 
और  ऊँचे  उड़  जाता। 
जाते  जाते  ऊँचे ऊपर, 
आकाश  को  छूकर  आता।